पितृमोक्ष अमावस्या पर शांतिकुंज में गूंजा पूर्वजों का स्मरण 18 पारियों में संपन्न हुए श्राद्ध संस्कार
पितृमोक्ष अमावस्या पर शांतिकुंज में गूंजा पूर्वजों का स्मरण 18 पारियों में संपन्न हुए श्राद्ध संस्कार
भारत आवाज़ (24*7)
(टीटू कुमार) हरिद्वार: अपने पूर्वजों के प्रति अटूट श्रद्धा कृतज्ञता और आत्मीय स्मरण के भाव के साथ पितृमोक्ष अमावस्या पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में भव्य रूप से श्राद्ध संस्कार संपन्न हुए। परिसर में चार अलग-अलग स्थानों पर कुल 18 पारियों में आयोजित इन संस्कारों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार और गुजरात सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं और शांतिकुंज के परिजनों ने विधि-विधान से अपने पितरों का तर्पण और स्मरण किया। इस विशेष अवसर पर उन पूर्वजों का भी श्राद्ध किया गया जिनकी तिथि ज्ञात नहीं होती है।
विदेशों से भी जुड़े वर्चुअल श्रद्धालु:
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि जर्मनी, इटली, अमेरिका, इंग्लैण्ड और लिथुआनिया सहित कई देशों के श्रद्धालुओं ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध संस्कार संपन्न कराए और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रति आस्था प्रकट की।
संस्कारों की निरंतरता है जरूरी:
इस दौरान शांतिकुंज के आचार्यों ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में श्राद्ध संस्कार केवल कर्मकांड नहीं बल्कि पूर्वजों के उपकारों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। पूर्वजों के प्रति सम्मान का यह भाव परिवार में संस्कारों की निरंतरता बनाए रखता है इसलिए नई पीढ़ी को इस परंपरा से परिचित कराना आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के आदर्शों के अनुरूप शांतिकुंज में सभी संस्कार वैदिक पद्धति से उच्च प्रशिक्षित आचार्यों द्वारा निःशुल्क संपन्न कराए जाते हैं।




