हरिद्वार को स्वच्छ व भव्य बनाने के लिए 12वें दिन भी गरजा स्वच्छता अभियान, गंगा घाटों से उठाया टनों के हिसाब से कचरा ।
हरिद्वार को स्वच्छ व भव्य बनाने के लिए 12वें दिन भी गरजा स्वच्छता अभियान, गंगा घाटों से उठाया टनों के हिसाब से कचरा ।

भारत आवाज़ (24*7)
(टीटू कुमार) हरिद्वार। आगामी महाकुंभ-2027 की तैयारियों के तहत धर्मनगरी हरिद्वार को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित रूप देने के लिए चलाया जा रहा विशेष स्वच्छता महाअभियान रविवार को 12वें दिन भी पूरी ऊर्जा के साथ जारी रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर कुंभ मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मार्गदर्शन में यह महाअभियान जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
प्रमुख घाटों पर युद्धस्तर पर चला सफाई अभियान
अभियान के तहत रविवार को सुभाष घाट, परशुराम घाट डामकोठी और प्रसिद्ध हरकी पौड़ी सहित आसपास के प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक सफाई की गई। इस दौरान घाटों गंगा किनारे और सार्वजनिक स्थलों से जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से टनों कूड़ा व अपशिष्ट एकत्र किया गया। एकत्र किए गए कचरे को त्वरित और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए नगर निगम को सौंप दिया गया है।
जनसहभागिता बनी अभियान की ताकत
इस महाअभियान में जिला प्रशासन, नगर निगम, आपदा प्रबंधन और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के साथ-साथ सामाजिक धार्मिक और स्वयंसेवी संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रमुख प्रतिभागी संस्थाएं: स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति, भारतीय योग संस्थान, परशुराम अखाड़ा, भारत स्काउट एंड गाइड और सेतु फाउंडेशन सहित विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों व औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने हाथों में झाड़ू थामकर स्वच्छता का संदेश दिया।
प्रशासन की अपील: गंगा में न बहाएं कपड़े और कचरा
जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों, श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों से इस स्वच्छता महाअभियान में लगातार योगदान देने की अपील की है।
प्रशासन ने विशेष रूप से आग्रह किया है कि:
गंगा घाटों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा बिल्कुल न फैलाएं।
पुराने कपड़े या अन्य अपशिष्ट सामग्री गंगा में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित कचरा संग्रह स्थलों पर ही डालें ताकि उनका उचित निस्तारण हो सके।
सामूहिक प्रयासों और जनसहभागिता के जरिए कुंभ 2027 से पहले हरिद्वार को एक विश्वस्तरीय स्वच्छ और दिव्य स्वरूप देने की दिशा में यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।




