विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: आत्म-देखभाल के साथ दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी है लेखिका शिवानी गौर
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: आत्म-देखभाल के साथ दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी है लेखिका शिवानी गौर
भारत आवाज़ (24*7)
(ब्यूरो रिपोर्ट) लेखिका । विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर लेखिका शिवानी गौर ने एक बेहद संवेदनशील और विचारणीय संदेश साझा किया है। उन्होंने अपने लेख के माध्यम से इस बात पर जोर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य का दायरा केवल अपनी व्यक्तिगत देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दूसरों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और व्यवहार की संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
व्यवहार की समीक्षा की आवश्यकता
लेखिका का कहना है कि हम अक्सर अपने तनाव और परेशानियों को लेकर सजग रहते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि हमारे शब्द लहजा और उपेक्षा किसी दूसरे के मन पर गहरा आघात कर सकती है। किसी की भावनाओं को नजरअंदाज करना अपमान करना या उसकी परेशानी को मजाक में उड़ा देना उसके आत्मविश्वास को ठेस पहुँचाता है। घर विद्यालय कार्यस्थल या व्यक्तिगत रिश्तों—हर जगह हमारे व्यवहार की संवेदनशीलता मायने रखती है।
दूसरों के मानसिक सुकून का रखें ध्यान
शिवानी गौर ने अपील की है कि हमें स्वयं से यह सवाल करना चाहिए कि क्या हमारे शब्द किसी को अनावश्यक पीड़ा तो नहीं दे रहे? उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति की समस्या का समाधान करना हमारे बस में भले न हो लेकिन अपने व्यवहार से किसी की परेशानी को बढ़ाने से बचना हमारे हाथ में है। किसी को ध्यान से सुनना और विनम्रता अपनाना भी एक बहुत बड़ा भावनात्मक सहयोग है।
स्वस्थ समाज का निर्माण
लेखिका ने अंत में संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल केवल खुद को टूटने से बचाना नहीं है बल्कि अपने आचरण से दूसरों को टूटने से बचाने की संवेदनशीलता भी है। एक स्वस्थ मन की नींव ऐसे सामाजिक वातावरण में ही टिकी होती है जहाँ संवाद सम्मान और भावनाओं के लिए पूरा स्थान हो।




