धामी सरकार की योजना से बदला हेमा नेगी का भाग्य लालढांग में शुरू की 10 लाख की मसाला यूनिट
धामी सरकार की योजना से बदला हेमा नेगी का भाग्य लालढांग में शुरू की 10 लाख की मसाला यूनिट
भारत आवाज़ (24*7)
(विशाल सिंह) हरिद्वार। प्रदेश सरकार की स्वरोजगार योजनाओं और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के प्रयासों से उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाएँ अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। हरिद्वार जनपद के लालढांग क्षेत्र में आशा ग्राम संगठन की अध्यक्ष हेमा नेगी ने 10 लाख रुपये की लागत से मसाला प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर न केवल अपने सपनों को उड़ान दी है बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोल दिए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा के अनुरूप और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मार्गदर्शन में जिले में चलाए जा रहे आजीविका प्रोत्साहन अभियानों के बीच हेमा नेगी की यह सफलता बाकी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
9 लाख रुपये का मिला सरकारी और वित्तीय सहयोग
हेमा नेगी ने दिसंबर 2025 में इस मसाला यूनिट की नींव रखी थी। इस उद्यम को खड़ा करने में ‘ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका संवर्धन योजना’ (REAP) की अहम भूमिका रही।
- 6 लाख रुपये: आरईएपी (REAP) परियोजना के तहत सब्सिडी
- 3 लाख रुपये: वित्तीय सहयोग / ऋण (Loan)
- 1 लाख रुपये: हेमा नेगी का व्यक्तिगत निवेश
सरकारी योजनाओं के इस मज़बूत संबल से शुरू हुई यह प्रोसेसिंग यूनिट आज उनके स्वावलंबन का मुख्य आधार बन चुकी है।
हर महीने 60 हजार रुपये का टर्नओवर महिलाओं को मिल रहा रोजगार
हेमा नेगी के मुताबिक वर्तमान में उनकी यूनिट से हर महीने लगभग 60 हजार रुपये का कारोबार हो रहा है। शुद्ध और स्थानीय मसालों के उत्पादन से जहाँ एक ओर बाजार में बेहतर उत्पाद पहुँच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी इस व्यवसाय से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
योजनाओं के सहयोग से मिला आगे बढ़ने का हौसला
अपनी सफलता का श्रेय राज्य सरकार और आरईएपी परियोजना को देते हुए हेमा नेगी ने कहा:
अगर सही समय पर वित्तीय मदद और मार्गदर्शन न मिलता तो यह व्यवसाय शुरू करना आसान नहीं होता। अब मेरा मुख्य उद्देश्य अपने इस उद्यम को और बढ़ाकर अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देना है ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
लालढांग की यह मसाला यूनिट इस बात का जीता-जागता सबूत है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के साथ सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए, तो गाँव-देहात में भी सफल उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं।




