इंसानियत शर्मसार: हरिद्वार में कूड़े के ढेर में रोती मिली 7 दिन की मासूम वंदना गुप्ता ने बचाई जान
इंसानियत शर्मसार: हरिद्वार में कूड़े के ढेर में रोती मिली 7 दिन की मासूम वंदना गुप्ता ने बचाई जान

भारत आवाज़ (24*7)
(विशाल सिंह) हरिद्वार: ममता और इंसानियत को तार-तार कर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा कांप उठेगा। रानीपुर मोड़ स्थित भगत सिंह चौक के पास आधी रात को कूड़े के ढेर में सात दिन की एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में रोती-बिलखती मिली। इस दिल दहला देने वाली घटना ने समाज के उन चेहरों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जो रिश्तों और औलाद को महज एक बोझ समझते हैं।
रात के सन्नाटे में गूंजी मासूम की चीखें
बुधवार की रात जब शहर नींद की आगोश में था तभी भगत सिंह चौक के पास से गुजर रहे कुछ राहगीरों को एक बच्चे के रोने की कमजोर सी आवाज सुनाई दी। जब वे आवाज की दिशा में आगे बढ़े तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कूड़े के ढेर के बीच एक सात दिन की नन्ही जान ठंड और दर्द से सिसक रही थी। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
वंदना गुप्ता बनीं फरिश्ता दिखाई सच्ची इंसानियत
इस खौफनाक और असंवेदनशील माहौल में दरिद्र नारायण वंदना ट्रस्ट की वंदना गुप्ता देवदूत बनकर सामने आईं। बिना एक पल गंवाए उन्होंने प्रशासनिक और मानवीय जिम्मेदारी का परिचय देते हुए तुरंत बच्ची को अपनी देखरेख में लिया और फौरन अस्पताल पहुंचाया। समय पर इलाज मिलने से मासूम की जान बच गई। एक तरफ जहां इस घटना ने समाज को शर्मसार किया वहीं वंदना गुप्ता के इस साहसिक और मानवीय कदम ने मानवता की ज्योति को जलाए रखा।
पुलिस ने संभाला मोर्चा तलाश जारी
घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 पर पुलिस को अलर्ट किया गया। रात की गश्त पर मुस्तैद गैस प्लांट चौकी प्रभारी अशोक सिरस्वाल तुरंत अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बच्ची को सुरक्षित अस्पताल में भर्ती कराया।
बड़े सवाल: कौन है वो बेरहम?
आज पूरा हरिद्वार इन सवालों के जवाब तलाश रहा है:
- आखिर उस सात दिन की मासूम का कसूर क्या था?
- उसे इतनी बेरहमी से ठंड और कचरे के बीच फेंकने वाले वे कौन दरिंदे हैं?
- क्या समाज में संवेदनशीलता इतनी मर चुकी है?
फिलहाल पुलिस आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और उस बेरहम शख्स की तलाश में जुटी है जिसने ममता को कलंकित किया है।




