विजयदशमी पर श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में गूंजे जयकारे संतों ने विधि-विधान से किया शस्त्र पूजन
विजयदशमी पर श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में गूंजे जयकारे संतों ने विधि-विधान से किया शस्त्र पूजन

भारत आवाज़ (24*7)
(विशाल सिंह) हरिद्वार। बुराई पर अच्छाई और धर्म की जीत के प्रतीक पर्व विजयदशमी (दशहरा) पर कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में सनातन परंपरा का अनूठा रूप देखने को मिला। अखाड़े के संतों ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के नेतृत्व में पूरी भव्यता और विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन किया।
सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश भालों का हुआ विशेष पूजन
कार्यक्रम के दौरान पंडित अवधेश शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना संपन्न कराई। अखाड़े के प्राचीन व आराध्य देवता माने जाने वाले ‘सूर्य प्रकाश’ और ‘भैरव प्रकाश’ भालों के साथ-साथ अखाड़े के अन्य पारंपरिक और आधुनिक शस्त्रों का भी पूजन किया गया। इस दौरान सभी संतों ने सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्प लिया।
अखाड़ों की ऐतिहासिक परंपरा?
इस अवसर पर श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बुराई का पूरी तरह अंत करने के लिए ज्ञान के साथ-साथ शस्त्र की शक्ति की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्म की रक्षा के लिए ही नागा संन्यासियों को संगठित कर अखाड़ों की स्थापना की थी। उन्होंने शास्त्र ज्ञान के साथ-साथ शस्त्र ज्ञान का विधान भी स्थापित किया, ताकि सनातन संस्कृति की रक्षा की जा सके। इसी प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी संत समाज धर्म की रक्षा के लिए तत्पर रहता है।
गरिमामयी उपस्थिति
इस पावन अवसर पर अखाड़े के कई वरिष्ठ संत और महात्मा उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- महंत कैलाश भारती
- श्रीमहंत मनोज गिरि
- महंत विनोद गिरि उर्फ हनुमान बाबा
- स्वामी ज्ञान भारती
- स्वामी हरिशंकर गिरि
- स्वामी किशनपुरी
- स्वामी कुंदन पुरी महाराज
कार्यक्रम के अंत में सभी संतों ने एक-दूसरे को विजयदशमी की बधाई दी और देश में शांति व सद्भाव की कामना की।




