कुंभ-2027: हरिद्वार में 15 मार्च को होगा उत्तराखंड की देव डोलियों का भव्य अमृत स्नान
कुंभ-2027: हरिद्वार में 15 मार्च को होगा उत्तराखंड की देव डोलियों का भव्य अमृत स्नान

भारत आवाज़ (24*7)
- कुंभ मेला-2027 में देव डोलियों की भव्य शोभायात्रा और गंगा स्नान बनेगा मुख्य आकर्षण
- 14 मार्च को ऋषिकेश में निकलेगी शोभायात्रा 15 मार्च को हरिद्वार में होगा पवित्र स्नान
- मेला प्रशासन और आयोजन समिति की बैठक में तैयारियों को लेकर बनी रणनीति
हरिद्वार, 28 अक्टूबर आगामी कुंभ मेला-2027 में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और जन-आस्था की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आने वाली पौराणिक देव डोलियों की भव्य शोभायात्रा और गंगा स्नान इस महाकुंभ का प्रमुख आकर्षण केंद्र होगा। आगामी 15 मार्च 2027 को हरिद्वार में देव डोलियों का दिव्य अमृत स्नान संपन्न होगा।
इस भव्य आयोजन की तैयारियों को गति देने के लिए शुक्रवार को मेला नियंत्रण भवन, हरिद्वार में अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती की अध्यक्षता में ‘देवभूमि लोक संस्कृति विरासत शोभायात्रा समिति’ के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान
बैठक को संबोधित करते हुए अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ मेला-2027 में देव डोलियों का आगमन और स्नान उत्तराखंड की सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं व लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का स्वर्णिम अवसर है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को देवभूमि की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने आश्वस्त किया कि आयोजन को पूरी भव्यता धार्मिक गरिमा और पारंपरिक स्वरूप के साथ संपन्न कराया जाएगा। देव डोलियों के आवागमन ठहराव सुरक्षा एवं स्नान की समुचित व्यवस्थाओं के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है।
14 मार्च को ऋषिकेश में शोभायात्रा 15 मार्च को हरिद्वार में स्नान
बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि:
- 14 मार्च 2027: ऋषिकेश में देव डोलियों की भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा।
- 15 मार्च 2027: हरिद्वार में देव डोलियों का ऐतिहासिक एवं दिव्य अमृत स्नान आयोजित होगा।
बैठक में यह प्रमुख लोग रहे मौजूद
बैठक में आवागमन मार्गों, ठहराव स्थलों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों व वेशभूषा तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हर्षमणि व्यास, विपिन जोशी, बंशीधर पोखरियाल, द्वारिका भट्ट, रमेश पैन्यूली, गजेंद्र सिंह कंडियाल, भगवान सिंह रांगड़, प्रमोद डोभाल, जसराम ढोंढियाल, मुकेश जोशी और आचार्य भवानी दत्त मैंदोलिया सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।




