हरिद्वार: रिश्वतखोरी और धमकी के मामले में दो उप निरीक्षकों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज पुलिस महकमे में हड़कंप
हरिद्वार: रिश्वतखोरी और धमकी के मामले में दो उप निरीक्षकों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज पुलिस महकमे में हड़कंप

भारत आवाज़ (24*7)
फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर मांगे थे लाखों रुपये एनकाउंटर की धमकी देने का भी आरोप
एसएसपी के निर्देश पर एसपी देहात की जांच में हुई पुष्टि 16 महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद हुई बड़ी कार्रवाई
(विशाल सिंह) | हरिद्वार हरिद्वार जनपद के गंगनहर कोतवाली क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाले दो उप निरीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से महकमे में हड़कंप मच गया है और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
बागपत जिले के निरपुड़ा निवासी निश्चय राणा ने उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी कि उनके छोटे भाई निवेश राणा को एक मामले में फंसाया गया था। इस मामले से राहत दिलाने और फाइनल रिपोर्ट (FR) लगाने के एवज में तत्कालीन पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार पैसों की मांग की गई और प्रताड़ित किया गया।
दोनों पुलिसकर्मियों के कारनामे:
- पहला आरोपी – तत्कालीन विवेचक मनदीप सिंह: आरोप है कि विवेचक मनदीप सिंह ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने का डर दिखाकर और धमकाकर 3.50 लाख रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद 6 अक्टूबर 2024 को मामले में अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई।
- दूसरा आरोपी – उपनिरीक्षक बलवंत पंवार: जब मामले की दोबारा विवेचना शुरू हुई, तो संपर्क में आए उपनिरीक्षक बलवंत पंवार ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर 5 लाख रुपये की मांग शुरू कर दी।
जान से मारने की धमकी और प्रताड़ना
शिकायतकर्ता निश्चय राणा का आरोप है कि पैसे न देने पर उनके भाई निवेश राणा को गोली मारकर (एनकाउंटर कर) जेल भेजने की धमकी दी गई। भाई की सुरक्षा और डर के कारण उन्होंने किसी तरह एक लाख रुपये दे दिए लेकिन इसके बाद भी चार लाख रुपये की अतिरिक्त मांग लगातार की जाती रही।
16 महीने बाद हुई कार्रवाई ऐसे खुला मामला
- साक्ष्य प्रस्तुत करना: पीड़ित निश्चय राणा ने 1 जुलाई 2025 को तत्कालीन एसएसपी के समक्ष पेश होकर इस पूरे मामले से जुड़े ऑडियो-वीडियो और अन्य पुख्ता डिजिटल साक्ष्य सौंपे थे।
- एसपी देहात की जांच: साक्ष्यों के आधार पर एसएसपी के निर्देश पर एसपी देहात के नेतृत्व में मामले की गोपनीय और निष्पक्ष जांच कराई गई। जांच आख्या में दोनों उपनिरीक्षकों (मनदीप सिंह और बलवंत पंवार) को दोषी पाया गया।
- लंबी लड़ाई: हालांकि, जांच में दोष सिद्ध होने के बावजूद मुकदमा दर्ज होने में करीब 16 महीने का लंबा वक्त लग गया, जिसके बाद आखिरकार गंगनहर कोतवाली में दोनों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस ही गया।
हरिद्वार पुलिस का कड़ा संदेश
इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद हरिद्वार पुलिस की तरफ से साफ कर दिया गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महकमे का स्पष्ट संदेश है कि खाकी की आड़ में अवैध वसूली या कानून का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे आरोपी विभाग का अपना ही अधिकारी क्यों न हो।




