हरिद्वार में महाष्टमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब: माँ माया देवी मंदिर में गूंजे जयकारे दूर-दूर से पहुंचे भक्त
हरिद्वार में महाष्टमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब: माँ माया देवी मंदिर में गूंजे जयकारे दूर-दूर से पहुंचे भक्त

भारत आवाज़ (24*7)
(विशाल सिंह) हरिद्वार: शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में भक्ति और आस्था का एक अलौकिक और भव्य दृश्य देखने को मिला। सिद्धपीठ माँ माया देवी मंदिर में अलसुबह से ही श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा प्रांगण ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा। माँ के दर्शनों के लिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने लंबी कतारों में लगकर माँ के दरबार में हाजिरी लगाई और अपनी झोली फैलाई।
अष्टमी पर उमड़ी जनस्यूलाब, पुलिस-प्रशासन मुस्तैद
महाअष्टमी के दिन माँ माया देवी के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है यही कारण है कि मंदिर के पट खुलते ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मन्दिर भवन से लेकर मंदिर परिसर और बाहर मुख्य मार्ग तक भक्तों का तांता लगा रहा। हर कोई महामाया की एक झलक पाने को आतुर दिखाई दिया।
भीड़ के भारी दबाव को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े और दर्शन सुचारू रूप से चल सकें।
मंदिर के मुख्य पुजारी भास्कर पुरी ने बताया पौराणिक इतिहास
माँ माया देवी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी भास्कर पुरी ने मंदिर के गौरवशाली और पौराणिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह स्थल सनातन धर्म के सबसे पवित्र और शक्तिसंपन्न स्थानों में से एक है।
यह सिद्धपीठ माता सती के अंगों से जुड़ी पावन भूमि है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर आकाश मार्ग से प्रस्थान कर रहे थे तब यहाँ माता सती की नाभि और हृदय का भाग गिरा था। इसी कारण इस स्थान को अत्यंत पवित्र ‘शक्तिपीठ’ माना जाता है। माँ माया देवी को हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी यानी इस नगरी की रक्षा करने वाली कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ आकर मन्नत मांगता है माँ उसकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं।
भास्कर पुरी पुजारी, महामाया देवी मंदिर
भक्तिमय हुआ पूरा हरिद्वार
नवरात्रि की महाअष्टमी पर केवल माया देवी ही नहीं, बल्कि दक्क्षेश्वर महादेव मंदिर, चंडी देवी और मनसा देवी मंदिरों में भी भारी भीड़ देखने को मिली। परंतु माया देवी मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व होने के कारण यहाँ विशेष रौनक रही। मंदिर परिसर में घंटे-घड़ियालों की गूँज, धूप-धुएँ की महक और माँ के भजनों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से दिव्य और आध्यात्मिक बना दिया।




