सर्वपितृ अमावस्या पर जूना अखाड़े के संतों ने किया ब्रह्मलीन संतों व गुरुओं का तर्पण उत्तराखंड की सुख-समृद्धि की कामना
सर्वपितृ अमावस्या पर जूना अखाड़े के संतों ने किया ब्रह्मलीन संतों व गुरुओं का तर्पण उत्तराखंड की सुख-समृद्धि की कामना
भारत आवाज़ (24*7)
(विशाल सिंह) हरिद्वार: सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संतों ने अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के नेतृत्व में हरिद्वार के भैरव घाट पर विधि-विधान से तर्पण और पूजन किया। इस दौरान संतों ने अपने ब्रह्मलीन संतों गुरुओं और सिद्ध महात्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उत्तराखंड राज्य की सुख-समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की।
संत परंपरा और कृतज्ञता का पर्व
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि सर्वपितृ अमावस्या केवल पितरों का स्मरण करने का दिन नहीं है बल्कि यह हमारी संन्यास परंपरा के उन ब्रह्मलीन महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन तप, त्याग, साधना, धर्मरक्षा और राष्ट्रसेवा में समर्पित कर दिया। गुरुओं और महापुरुषों का स्मरण करना ही सनातन संस्कृति की वास्तविक आत्मा है।
आध्यात्मिक चेतना और देवभूमि का महत्व
श्री दूधेश्वरनाथ मठ के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़े के वरिष्ठ सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज और अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहाँ का सर्वांगीण विकास पूरे राष्ट्र की समृद्धि और प्रगति से जुड़ा हुआ है। वहीं हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर वीरेंद्र आनंद गिरि महाराज ने कहा कि गंगा तट पर किया गया यह तर्पण सनातन संस्कृति के संरक्षण का एक जीवंत प्रतीक है।
इस अवसर पर श्रीमहंत महेश पुरी, श्रीमहंत कंचन गिरि, श्रीमहंत शिवम सरस्वती, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि, पुजारी भास्कर पुरी, पुजारी दिवाकर पुरी, दीपक गिरि महाराज सहित जूना अखाड़े के तमाम थानापति और संत-महात्मा उपस्थित रहे।




